Ishq/Gham
Bina dard rang laal kaise poora?

Riddhi Kaushik
जब बैठक हुई,
कवि लेखकों की
तो कुछ रंगों की बातें छिड़ी
जहाँ ग़म का रंग पड़ा नीला,
ख़ुशी ने बढ़के थामा पीला
बात आई जब दर्द और इश्क़ की
तो नज़रें गईं रंग लाल पर
एक ने कहा ना इश्क़ कम गहरा,
ना रंग लाल कम गाढ़ा
इसी तर्क से तय किया, इश्क़ को लाल रंग दिया l
पर क्या दर्द में जुनून नहीं है?
और जो दर्द में जुनून है,
तो है कोई,
जिसे जुनून से इश्क़ नहीं है?
जिस दर्द में जुनून, उस जुनून से इश्क़
इश्क़ को जब दिया रंग लाल,
तो बोलो भला किसने
दर्द को लाल रंगने से किया इनकार?
दर्द का अस्तित्व गहरा है,
इश्क़ भरे हर जज़्बात में दर्द ठहरा है l
और जब इश्क़ बिना दर्द अधूरा
तो बिना दर्द, रंग लाल कैसे हो पूरा?










